Shayri

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Shayri
77
वो आँखों ही आँखों में करती है ऐसे बातें, के कानों कान किसी को खबर नही होती!!
Shayri
77
बहुत घटिया थे न हम......तो फ़िर और बताओ आज कल तो फरिश्तों के साथ.. उठते बैठते होंगे तुम..... SMile...🤨🤨
Shayri
81
वो जो चाय पीने पे डांटते थे... उसे कहना बात अब 🚬सिगरेट🚬 तक पहुंच गई है..... Smile...
Shayri
81
हर दिन के तूफानों से यूँ ख़ुद को बचा लेता हूँ, जज़्बात दबा लेता हूँ हाँ में हाँ मिला देता हूँ..
Shayri
75
तेरी शर्तों पर ही करना है अगर तुझे कबूल, ये सहूलियतें तो मुझे सारा जहाँ देता हैं।
Shayri
52
तूझे चाहकर कैसे किसी की चाह करूंगा, तूझे भूलकर क्यूं खुद को तबाह करूंगा, तू जिंदगी नहीं दिल्लगी भी है, फिर क्यूं किसी और को सोच के गुनाह करूंगा।
Shayri
49
इतना शोंक मत रखो इन मोहब्बत की गलियों में जाने का, रास्ता जाने का है मगर आने में नहीं....
Shayri
49
उसे भूल जाने का इरादा कर लिया है, भरोसा मुर्शिद खुद पर कुछ ज्यादा ही कर लिया है।।
Shayri
50
मतलब से मिलने वाले, मिलने का मतलब क्या जाने ।
Shayri
45
मजबूरियां न सुनाओ तुम, ये कबूल करो की बेवफा हो..
Shayri
47
प्रीत न करिए पंछी जैसी, जल सूखे उड़ जाएं प्रीत करिए मछली जैसी जल सूखे मर जाएं.. आयुष पंडित❤️
Shayri
46
चलो तुमसे बिछड़ने से इतना तो हुआ, अब तुमसे बिछड़ने का डर नही रहा।
Shayri
52
चलो तुमसे बिछड़ने से इतना तो हुआ, अब तुमसे बिछड़ने का डर नही रहा।
Shayri
52
परिन्दे शुक्रगुज़ार है पतझड़ के भी, तिनके कहाँ से लाते अगर सदाबहार रहती।
Shayri
49
कितना अजीब श़ख्स है वो बात करे तो लगता सिर्फ मेरा है... और न करे तो लगता की जानता ही नहीं...!!
Shayri
59
बात सिर्फ सिगरेट तक रहती तो कोई बात न थी... अब तो ये रातें तेरे नशे में गुजरती हैं....
Shayri
51
जाने क्यों महसूस हो रहा है ... के मुझे महसूस कर रहे हो तुम !!
Shayri
46
✍ऐसा क्या लिखूँ कि तेरे दिल को तस्सली हो जाए, क्या ये बताना काफी नहीं कि मेरी ज़िन्दगी हो तुम।💝
Shayri
46
एक मुद्दत हुई लड़े तुमसे ... एक अरसे से इश्क़ फीका है !!!
Shayri
45
हसरतें तो आज भी खत लिखती हैं मुझे ... पर अब मैं पुराने पते पर नहीं रहती !!! Mahi ❣
Shayri
40
कच्चा निकला रिश्ता ज़रा ... पक्के निकले जिद्द के दोनों !! Mahi 😔
Shayri
42
कांटों के जैसे बन गए थे तुम, निकालना भी,चलने के लिए ज़रूरी था ||
Shayri
39
मैं वो क्यों बनू जो तुम्हे चाहिए, तुम्हें वो कबूल क्यों नहीं जो मैं हूँ ||
Shayri
39
दो नावों पर सवार था उसकी ज़िंदगी का सफर.. हमने खुद कि नाव डूबो कर उसका सफ़र आसान कर दिया..!!
Shayri
41
आज अख़बार खरीदा तो मालूम हुआ कोई पहले ही खरीद चुका है उसको !
Shayri
40
वो चाय रखी है टेबल पर,इतवार पुराना ले आओ, हम कह देंगे आज छुट्टी है,तुम बस "दोस्त" पुराने ले आओ! ❤️
Shayri
39
☹️मेरी खामोशी से उसे कभी कोई फर्क नहीं पड़ता, शिकायत में दो लफ़्ज कह दूं तो चुभ जाते हैं।🤨
Shayri
41
🌟मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती, वजूद भुलाना पड़ता है, किसी को चाहने के लिए।💖
Shayri
45
सीख लो अब आंखों से मुस्कुराना.....😗👀😊 क्योंकि होठों की मुस्कान तो मास्क ने छुपा ली ! 😷😊😁
Shayri
42
साथ साथ बहुत घूमते हैं , हम दोनो रात भर, लोग मुझे आवारा और उसे चांद कहते हैं ।।
Shayri
43
जो चाहे कीजिए कोई सज़ा तो है ही नहीं ज़माना सोच रहा है कि ख़ुदा तो है ही नहीं। दिखा रहे हो नई मंज़िलों के ख़्वाब हमें तुम्हारे पास कोई रास्ता तो है ही नहीं। वो अपने चेहरे के दागों पे क्यों न फ़क्र करें अब उनके पास कोई आईना तो है ही नहीं। सब आसमान से उतरे हुए फरिश्तें हैं सियासी लोगों में कोई बुरा तो है ही नहीं।
Shayri
45
तुमने कहा था हर शाम हाल पूछेंगे.! बदल गए हो या तुम्हारे यहाँ शाम नहीं होती..!!
Shayri
47
हम हमेशां डरते थे जिसे खोने से..! उसने वो डर ही ख़त्म कर दिया मुझे छोड़ कर....!
Shayri
46
🥰कोई और तुम्हें चाहे तो दिल हमारा जलता है पर गुरूर है इस बात का कि तुम पर हर कोई मरता है😍
Shayri
42
मुझसे वादा करने वाले सुन ... प्यार से हो चुकी है मुझे घिन !!!
Shayri
41
अपने दिल की सुन अफवाहों से काम न ले, मुझे याद रख बेशक मेरा नाम न ले, तेरा वहम है कि मैं भूल गया हूं तुझे... मेरी कोई सांस नहीं जो तेरा नाम न ले।।।
Shayri
48
तुम्हे हम भी सताने पर उतर आएं तो क्या होगा, तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएं तो क्या होगा, हमे बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में.... अगर हम सच बताने पर उतर आए तो क्या होगा????
Shayri
41
💗💗 खुदा करे, मेरी उल्फत में तुम कुछ यूँ उलझ जाओ...!! मैं तुमको दिल में भी सोचूँ तो तुम समझ जाओ....!!💕 Mili...😎
Shayri
47
दिल पर तेरी हुकूमत, और रूह पर तेरा कब्जा है..!! अब कैसे लगेगा ये दिल कहीं, जब हर सांस पर तेरा ही जज्बा है..!!🥰
Shayri
42
अब तुझसे शिकायत करना मेरे हक मे नहीं, क्योंकि तू आरजू मेरी थी पर अमानत शायद किसी और की।
Shayri
42
हर दिन के तूफानों से यूँ ख़ुद को बचा लेता हूँ, जज़्बात दबा लेता हूँ हाँ में हाँ मिला देता हूँ..
Shayri
47
बहुत घटिया थे न हम......तो फ़िर और बताओ आज कल तो फरिश्तों के साथ.. उठते बैठते होंगे तुम..... SMile...🤨🤨
Shayri
40
वो आँखों ही आँखों में करती है ऐसे बातें, के कानों कान किसी को खबर नही होती!!
Shayri
47
माना हम अदब से बात नही करते पर ये मानो मतलब से बात नही करते, ये नरम लहजा ,प्यारी बातें तेरे लिए है, यकीन मानो हम हर किसीसे ऐसे बात नही करते।
Shayri
45
इस शहर में भी चांद तन्हा है बशर ... तारों को फ़ौज शामियाने सी है सजी !!!
Shayri
37
कुछ नहीं बचा कहने को, हर बात हो गई ,, आओ कहीं शराब पीएं, के रात हो गई !!! Mahi ❤️
Shayri
40
सुनना नही चाहता मैं किस्से तेरी मजबूरियों के, में खुद मजबूर हूँ, मुझे अब मोहब्बत नही करनी!
Shayri
37
दिल का वो कोना यादों से कभी भरता नहीं, कमबख्त इश्क है जिस्म से पहले मरता नहीं ।
Shayri
41
तुम्हे महफिल पसंद है और हमें तन्हाई, बताओ भला हमारा मेल कैसे होगा...
Shayri
38
ये तसल्ली तो दे दी उसने,,, के मामूली नहीं हैं हम .... अब ये कैसे पता चले के कितने कीमती हैं हम !!! Mahi ❤️